डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अदालत से एक और बड़ा झटका लगा है। पहले टैरिफ को गैरकानूनी करार देने के बाद अब अमेरिकी अदालत ने ट्रंप प्रशासन के फास्ट ट्रैक डिपोर्टेशन फैसले पर रोक लगाई है। अदालत का कहना है कि यह कदम अप्रवासियों के संवैधानिक अधिकारों का हनन करता है।
वॉशिंगटन डीसी की जिला जज जिया कॉब ने अपने फैसले में साफ कहा कि ट्रंप प्रशासन का यह आदेश पूरी तरह अनुचित है और अमेरिकी संविधान के पांचवें संशोधन का उल्लंघन करता है।
जज जिया कॉब ने क्या कहा?

जज के अनुसार, ट्रंप प्रशासन जनवरी से ऐसे अप्रवासियों को तुरंत गिरफ्तार कर बाहर निकालने पर जोर दे रहा था जिनके पास अमेरिकी नागरिकता के दस्तावेज़ नहीं थे। इसके तहत उन लोगों को भी निशाना बनाया जा रहा था जो शायद दो साल से अधिक समय से अमेरिका में रह रहे हों लेकिन उनके पास इसका लिखित प्रमाण न हो।
उन्होंने कहा,
पांचवें संशोधन के तहत अप्रवासियों को भी अधिकार दिए गए हैं। लेकिन प्रशासन का यह फैसला उनकी स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। सिर्फ हर हाल में उन्हें देश से बाहर करना उचित नहीं है।
ट्रंप प्रशासन की दलील
ट्रंप प्रशासन ने अदालत से इस फैसले पर रोक लगाने की अपील की थी। उनका कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा और आव्रजन नीतियों के खिलाफ है। उन्होंने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की बात कही है। लेकिन जिला अदालत ने फिलहाल अपने आदेश को बरकरार रखा है और ट्रंप की अपील खारिज कर दी है।
पहले भी टैरिफ पर झटका
यह पहला मौका नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप को अदालत से बड़ा झटका मिला हो। इससे पहले अमेरिका की एक संघीय अदालत ने ट्रंप के लगाए गए टैरिफ को गैरकानूनी बताया था। कोर्ट ने प्रशासन को टैरिफ हटाने और सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए 14 अक्टूबर तक का समय दिया है।
यह लगातार दूसरा बड़ा फैसला है जिसने ट्रंप की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अप्रवासी अधिकारों पर जोर
अमेरिकी अदालत ने स्पष्ट किया है कि भले ही कोई व्यक्ति अमेरिका का नागरिक न हो, फिर भी उसे संवैधानिक अधिकार हासिल हैं। इस फैसले से लाखों अप्रवासियों को राहत मिली है जो डर और असुरक्षा के माहौल में जी रहे थे।
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीति पर गंभीर सवाल खड़ा करता है और आगे आने वाले समय में इस पर बड़ा राजनीतिक विवाद हो सकता है।
चुनावी असर
अमेरिका में जल्द ही राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं और ट्रंप इस बार भी उम्मीदवार हैं। ऐसे में अदालत के लगातार फैसले उनके लिए राजनीतिक नुकसान का कारण बन सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार,
- एक ओर ट्रंप का कठोर रवैया उनके समर्थकों को लुभाता है।
- दूसरी ओर अदालत के फैसले विपक्ष को मजबूत तर्क देते हैं कि ट्रंप प्रशासन मानवाधिकारों और कानून के खिलाफ काम कर रहा है।
आगे क्या होगा?
ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि वह इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा। लेकिन कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि अदालत की राय बदलना आसान नहीं होगा क्योंकि फैसला संवैधानिक अधिकारों पर आधारित है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सुप्रीम कोर्ट ट्रंप प्रशासन को राहत देगा या फिर यह मामला ट्रंप की नीतियों पर एक और शिकंजा साबित होगा।
निष्कर्ष
अमेरिकी अदालत के फैसले ने साफ कर दिया है कि ट्रंप प्रशासन का फास्ट ट्रैक डिपोर्टेशन असंवैधानिक है और अप्रवासियों के अधिकारों का उल्लंघन करता है। यह फैसला ट्रंप के लिए एक बड़ा राजनीतिक और कानूनी झटका है। पहले टैरिफ और अब डिपोर्टेशन पर रोक ने उनकी नीतियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
Disclaimer
यह लेख उपलब्ध समाचार स्रोतों और अदालत के आधिकारिक फैसलों पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी किसी राजनीतिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नहीं है।