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India-China Relations 2025: सहयोग और चुनौतियों के बीच नया मोड़

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प्रस्तावना

India-China Relations 2025 इस समय अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक व्यापार का अहम मुद्दा बन चुका है। हाल ही में चीन के विदेश मंत्री वांग यी (Wang Yi) और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) की मुलाकात ने दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर खोले हैं। यह बैठक ऐसे समय हुई जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। इस बदलते माहौल में भारत और चीन के रिश्ते फिर से चर्चा में हैं।


India-China Relations 2025: नई बातचीत की शुरुआत

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि दोनों देशों को मिलकर काम करना चाहिए और दुनिया को स्थिरता प्रदान करनी चाहिए। उनका इशारा था कि “overwhelming bullying” और फ्री ट्रेड पर खतरे जैसी चुनौतियों के बीच भारत और चीन का सहयोग और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

वहीं, जयशंकर ने साफ कहा कि “हमने अपने रिश्तों में मुश्किल दौर देखा है, लेकिन अब हमें आगे बढ़ना है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए और प्रतिस्पर्धा को संघर्ष में बदलने से बचना चाहिए।


SCO Summit और India-China Relations 2025

यह मुलाकात केवल एक सामान्य डिप्लोमैटिक मीटिंग नहीं थी, बल्कि SCO Summit 2025 की तैयारियों का हिस्सा भी है। माना जा रहा है कि जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन की बैठक के दौरान आमने-सामने चर्चा करेंगे।

यह मोदी का पिछले सात सालों में चीन का पहला दौरा होगा, जो India-China Relations 2025 में नई दिशा तय कर सकता है।


Donald Trump Tariff और India-China Relations 2025

डोनाल्ड ट्रंप ने भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने पर 25% अतिरिक्त टैक्स लगाने की चेतावनी दी है। अगर यह लागू होता है, तो भारतीय निर्यातकों पर गहरा असर पड़ेगा।

ऐसे हालात में, भारत और चीन का आपसी सहयोग न सिर्फ दोनों देशों के लिए बल्कि पूरे एशिया और विश्व व्यापार के लिए भी अहम हो जाता है। यही कारण है कि India-China Relations 2025 केवल राजनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं।


Border Issue और सुरक्षा वार्ता

भारत और चीन के बीच सबसे बड़ा विवाद लद्दाख और गालवान घाटी (Galwan Valley) का है। पांच साल पहले हुई झड़पों के बाद रिश्ते सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे।

लेकिन अब वांग यी की इस यात्रा के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात होगी, जिसमें सीमा विवाद पर चर्चा होगी। अगर यहां प्रगति होती है, तो यह India-China Relations 2025 में भरोसे का नया अध्याय जोड़ सकती है।


व्यापार और आर्थिक सहयोग

हाल के महीनों में रिश्तों में नरमी आई है।

  • चीन ने यूरिया निर्यात पर लगी पाबंदी हटाई है।
  • भारत ने चीनी नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीज़ा फिर से शुरू किए हैं।
  • कई भारतीय कंपनियां चीनी टेक्नोलॉजी पार्टनर्स के साथ समझौते तलाश रही हैं।

ये सभी संकेत बताते हैं कि India-China Relations 2025 में व्यापारिक रिश्ते धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहे हैं।


Modi और Xi Jinping की भूमिका

भारत और चीन के रिश्तों को सामान्य बनाने में सबसे अहम भूमिका दोनों नेताओं – नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की होगी।

अगर दोनों नेता SCO समिट में सकारात्मक संकेत देते हैं, तो इसका असर सिर्फ India-China Relations 2025 पर नहीं बल्कि पूरे एशियाई क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ेगा।


निष्कर्ष

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि India-China Relations 2025 एक अहम मोड़ पर खड़े हैं। जहां एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति नई चुनौतियां पेश कर रही है, वहीं भारत और चीन का सहयोग वैश्विक स्थिरता का प्रतीक बन सकता है।

दोनों देशों ने यह संकेत दिया है कि मतभेदों को संभाला जा सकता है और रिश्तों को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है। अब दुनिया की नजर मोदी और जिनपिंग की मुलाकात पर टिकी है, जो आने वाले समय में India-China Relations 2025 का भविष्य तय करेगी।

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Prashant srivastava

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