इंग्लैंड सीरीज में दो प्लेयर ऑफ द सीरीज अवॉर्ड्स : Gautam Gambhir ने Harry Brook को विजेता चुना
हर इंग्लैंड घरेलू क्रिकेट सीरीज में दो Player of the Series अवॉर्ड दिए जाते हैं. यह नियम पहले से चला आ रहा.
एक अवॉर्ड इंग्लैंड का हेड कोच चुनता है. दूसरा अवॉर्ड विपक्षी टीम का कोच देता है. यह दिलचस्प प्रक्रिया है.
इस बार भारत और इंग्लैंड के बीच रोमांचक सीरीज खेली गई थी. सीरीज में शानदार प्रदर्शन दोनों तरफ से देखा गया.
Harry Brook और Shubman Gill दोनों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया. दोनों ने टीम को मुश्किल समय में संभाला.
जहाँ एक ओर इंग्लैंड कोच ने गिल को चुना, वहीं Gautam Gambhir ने ब्रूक को विजेता चुना.

शुभमन गिल: असली हीरो कहे गए
Shubman Gill ने सीरीज में लगातार रन बनाए. उन्होंने हर पारी में संयम और क्लास का परिचय दिया.
गिल ने एक शानदार शतक और दो अर्धशतक जमाए. उनकी बल्लेबाजी इंग्लिश गेंदबाजों को भारी पड़ी.
Brendon McCullum, जो इंग्लैंड के कोच हैं, उन्होंने बिना देरी गिल को Player of the Series चुना.
मैकलम ने कहा, “गिल की तकनीक और मानसिकता कमाल की थी.” उनका प्रदर्शन टीम इंडिया की रीढ़ बना.
उनकी राय को कई विशेषज्ञों ने सराहा. Harry Brook ने भी गिल की तारीफ खुले दिल से की.
दो कोच, दो निर्णय: सोशल मीडिया पर बवाल
जैसे ही दोनों कोचों के फैसले सामने आए, सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई. ट्विटर पर हजारों पोस्ट्स आए.
कुछ लोगों ने गौतम गंभीर को ट्रोल किया. उन्होंने कहा कि गिल ज्यादा डिज़र्विंग खिलाड़ी थे.
वहीं कुछ ने गंभीर का समर्थन किया. उनका कहना था – “ब्रूक ने अपनी टीम के लिए जरूरी योगदान दिया.”
यह पहली बार नहीं है जब कोचों की राय अलग हो. मगर इस बार खिलाड़ी ने खुद ही फैसला पलट दिया.
Harry Brook की सादगी और निष्पक्षता ने लोगों का दिल जीत लिया. यही खेल भावना कहलाती है.
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खिलाड़ी का विनम्र व्यवहार चर्चा में
ब्रूक का ये बयान खिलाड़ियों के लिए मिसाल बन गया. आजकल खिलाड़ी अक्सर स्वयं को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं.
मगर ब्रूक ने जो कहा, वो विनम्रता और आत्मनिरीक्षण की मिसाल था. इससे उनका कद और ऊँचा हुआ.
गौतम गंभीर भी उनके इस व्यवहार से प्रभावित होंगे. उन्होंने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
अक्सर बहस चयन पर होती है. मगर जब खुद चयनित खिलाड़ी कहे कि “मैं डिज़र्व नहीं करता”, वो बड़ी बात है.
इसी कारण से Harry Brook का यह बयान वायरल हो गया. क्रिकेट प्रेमी इसे खेल भावना का उदाहरण कह रहे हैं.
आंकड़े क्या कहते हैं?
आइए थोड़ा आंकड़ों पर नजर डालते हैं. Shubman Gill ने इस सीरीज में 4 मैचों में 282 रन बनाए.

उनका औसत 70.5 रहा और स्ट्राइक रेट 93 से ऊपर. उन्होंने एक सेंचुरी और दो फिफ्टी ठोकीं.
वहीं Harry Brook ने भी चार मैचों में 236 रन बनाए. उनका औसत 59 और स्ट्राइक रेट 130 के आसपास था.
ब्रूक की पारी तेज और आक्रामक थी. वहीं गिल की पारी नियंत्रित और स्थिरता वाली थी.
इन आंकड़ों से दोनों की भूमिका अलग दिखती है. मगर दोनों टीम के लिए अहम थे, यह मानना पड़ेगा.
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क्रिकेट में सम्मान का नया चेहरा
आज के युग में खिलाड़ी हर अवॉर्ड को गर्व से लेते हैं. लेकिन Harry Brook ने यह साबित किया कि विनम्रता बड़ी चीज है.
गौतम गंभीर का फैसला भले ही अलग था, लेकिन ब्रूक ने उसे बहुत सम्मानपूर्वक संभाला. यह बड़ी बात है.
इसी खेल भावना के कारण क्रिकेट को जेंटलमैन गेम कहा जाता है. यह घटना उसी भावना को ज़िंदा रखती है.
कोचों का चयन अलग-अलग कारणों पर आधारित होता है. लेकिन खिलाड़ियों की सोच टीम की भावना को दर्शाती है.
Harry Brook और Shubman Gill दोनों क्रिकेट के चमकते सितारे हैं. इनका संयम और सम्मान प्रेरणादायक है.
विशेषज्ञों की राय
क्रिकेट विशेषज्ञों ने भी इस मुद्दे पर बात की. आकाश चोपड़ा ने कहा – “ब्रूक की सोच बहुत बड़ी बात है.”
पूर्व इंग्लिश खिलाड़ी नासिर हुसैन ने कहा, “ब्रूक ने साबित किया कि खेल में विनम्रता कितनी जरूरी है.”
भारत के कोच द्रविड़ ने भी गिल की तारीफ की. उन्होंने कहा, “गिल ने एक सीनियर बल्लेबाज़ की तरह जिम्मेदारी निभाई.
गौतम गंभीर ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. पर उन्हें भी शायद ब्रूक की सोच प्रेरित कर गई हो.
निष्कर्ष: खेल भावना की जीत
अंततः यह कह सकते हैं कि यह विवाद नहीं, बल्कि एक प्रेरक घटना रही. इसमें सबकी सोच ने खेल को ऊँचाई दी.
गौतम गंभीर ने जिस नज़र से देखा, वो भी सही थी. Harry Brook की विनम्रता उससे भी बड़ी बात रही.
Player of the Series का चयन चाहे जो हो, मगर असली विजेता खेल भावना ही बनी है.
England Series में यह दृश्य साबित करता है कि सम्मान और आत्मनिरीक्षण खिलाड़ी को महान बनाते हैं.
इस सीरीज ने हमें ना सिर्फ रोमांच दिया, बल्कि इंसानियत और आत्मसम्मान की सीख भी दी.
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