---Advertisement---

डिजिटल रेप क्या है? क़ानून, सज़ा और समाज पर असर

By
On:
Follow Us

परिचय

आज के दौर में यौन अपराधों को लेकर समाज और क़ानून दोनों और सख्त हो गए हैं। फिर भी कई बार कुछ शब्द लोगों को भ्रमित कर देते हैं। ऐसा ही एक शब्द है – डिजिटल रेप
कई लोग सोचते हैं कि डिजिटल शब्द का मतलब इंटरनेट या ऑनलाइन अपराध से है, लेकिन असल में इसका अर्थ कुछ और ही है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर ज़िला न्यायालय ने एक मामले में आरोपी को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई और इस दौरान “डिजिटल रेप” शब्द का इस्तेमाल किया गया। इसने एक बार फिर लोगों का ध्यान इस अपराध और इसके क़ानूनी पहलुओं की ओर खींचा।


डिजिटल रेप क्या होता है?

डिजिटल रेप शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द “Digitus” से हुई है, जिसका अर्थ होता है उंगली। कानूनी भाषा में जब किसी महिला या लड़की के प्राइवेट पार्ट्स में उसकी सहमति के बिना उंगली या किसी वस्तु का प्रवेश कराया जाता है, तो इसे डिजिटल रेप कहा जाता है।

👉 सुप्रीम कोर्ट की वकील दिव्या सिंह के अनुसार –
“डिजिटल रेप वह यौन अपराध है जिसमें बिना सहमति के किसी महिला के शरीर में उंगली या कोई अन्य वस्तु डाली जाती है। यह रेप की ही श्रेणी में आता है और इसके लिए कड़ी सज़ा का प्रावधान है।”


रेप और डिजिटल रेप में अंतर

साल 2013 से पहले तक रेप की परिभाषा काफी सीमित थी। उस समय केवल पेनिस के वजाइना में प्रवेश को ही रेप माना जाता था।

  • अगर किसी महिला के प्राइवेट पार्ट में उंगली या वस्तु का प्रवेश कराया जाता था, तो यह रेप नहीं बल्कि IPC की धारा 354 (महिला की मर्यादा भंग करना) या धारा 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध) के अंतर्गत आता था।
  • इस वजह से अक्सर आरोपी को कम सज़ा मिलती थी और पीड़िताओं को न्याय नहीं मिल पाता था।

निर्भया कांड (2012) के बाद बने क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट 2013 ने इस परिभाषा को बदल दिया। इसके बाद डिजिटल रेप को भी स्पष्ट रूप से रेप की श्रेणी में शामिल किया गया।


क़ानून में डिजिटल रेप की परिभाषा

भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के लागू होने के बाद, अब IPC की धारा 375 की जगह BNS की धारा 63 लागू होती है।

  • धारा 63B: इसमें डिजिटल रेप को गंभीर यौन अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
  • धारा 64: इसके अनुसार, ऐसे मामलों में कम से कम 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सज़ा हो सकती है।
  • धारा 65 (2): अगर पीड़िता की उम्र 12 साल से कम है, तो आरोपी को कम से कम 20 साल की सज़ा, आजीवन कारावास या मृत्युदंड भी दिया जा सकता है।

डिजिटल रेप मामलों में पुलिस और अदालत की प्रक्रिया

डिजिटल रेप के मामलों में पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी होती है।

  1. पीड़िता का मेडिकल एग्ज़ामिनेशन
  2. फॉरेंसिक सैंपल कलेक्शन
  3. पीड़िता का बयान दर्ज करना
  4. केस को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में भेजना

👉 वकीलों का मानना है कि कई बार मेडिकल रिपोर्ट में चोट न मिलने पर केस कमज़ोर हो जाता है, लेकिन क़ानून साफ़ कहता है कि चोट का होना ज़रूरी नहीं है।


डिजिटल रेप की सज़ा

  • सामान्य मामलों में: 10 साल से लेकर आजीवन कारावास
  • 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ: 20 साल से लेकर मृत्युदंड तक
  • इसके अलावा: जुर्माना भी लगाया जा सकता है

यह साफ़ है कि क़ानून इस अपराध को उतनी ही गंभीरता से देखता है जितना सामान्य रेप को।


समाज पर असर और जागरूकता की ज़रूरत

कई बार लोग “डिजिटल रेप” शब्द को लेकर असमंजस में रहते हैं। जागरूकता की कमी की वजह से पीड़िता न्याय से वंचित रह जाती है।

  • बच्चों को गुड टच और बैड टच की शिक्षा घर से ही दी जानी चाहिए।
  • स्कूल और कॉलेजों में यौन शिक्षा (Sex Education) को अनिवार्य किया जाना चाहिए।
  • समाज को यह समझना होगा कि बिना पेनिस पेनेट्रेशन के भी डिजिटल रेप रेप की ही श्रेणी में आता है।

👉 सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील कामिनी जायसवाल कहती हैं –
“डिजिटल रेप के मामलों में मानसिक और भावनात्मक आघात अन्य रेप मामलों जैसा ही होता है। इसलिए ऐसे अपराधों को भी उतनी ही गंभीरता से लेना चाहिए।”


हालिया मामले और उदाहरण

  • गौतम बुद्ध नगर केस (2024): आरोपी को डिजिटल रेप के मामले में आजीवन कारावास की सज़ा।
  • दिल्ली हाई कोर्ट (2014): ट्यूशन टीचर के रिश्तेदार प्रदीप कुमार को 4 साल की बच्ची के साथ डिजिटल रेप के मामले में 12 साल की सज़ा।

ये फैसले बताते हैं कि न्यायालय ऐसे अपराधों को नज़रअंदाज़ नहीं करता और कठोर सज़ा देता है।


निष्कर्ष

डिजिटल रेप केवल एक कानूनी शब्द नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक समस्या है। यह अपराध पीड़िता को मानसिक और शारीरिक रूप से उतना ही नुकसान पहुंचाता है जितना सामान्य रेप करता है। क़ानून ने इसे रेप की ही श्रेणी में रखकर स्पष्ट कर दिया है कि इसमें किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।

👉 हमें ज़रूरत है जागरूकता बढ़ाने की, बच्चों को सही शिक्षा देने की और समाज में पीड़िता को दोष देने की प्रवृत्ति ख़त्म करने की।

Elvish Yadav पहले भी कई विवादों में घिरे रहे हैं, जैसे Snake Venom Rave Party Case और Bigg Boss OTT 2 की विजय और विवाद .

हाल ही में Elvish यादव के घर पर गोलीबारी की खबर ने सबको चौंका दिया, जिसमें Bhau Gang ने जिम्मेदारी ली .

जानें Himanshu Bhau कौन है और Bhau Gang का इतिहास , साथ ही गिरोह की हिंसक पृष्ठभूमि .

🔔 Join हमारा WhatsApp Channel

Prashant srivastava

प्रशांत श्रीवास्तव Digital News Tak के संस्थापक हैं। यह एक भरोसेमंद हिंदी समाचार प्लेटफॉर्म है, जहाँ पाठकों को देश-दुनिया की ताज़ा घटनाएं, मनोरंजन समाचार और ताज़ा खबरें हिंदी में सबसे पहले और सटीक रूप से मिलती हैं। Digital News Tak आज लाखों लोगों की पसंदीदा जगह है भरोसेमंद हिंदी समाचारों के लिए।

For Feedback - feedback@example.com

1 thought on “डिजिटल रेप क्या है? क़ानून, सज़ा और समाज पर असर”

Leave a Comment