1. बाढ़ से तबाही का मंजर
गंगा के पुत्र सीधे स्वर्ग जाते हैं : उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बाढ़ ने तबाही मचा रखी है, हालात बेहद खराब और चिंताजनक हो गए हैं।
राज्य के 17 जिलों में 402 गांव पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं, लोग बेघर हो गए।
लोगों को अपनी जान और सामान छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
गंगा के पुत्र सीधे स्वर्ग जाते हैं जैसे बयान इस संकट में पीड़ितों के जख्मों पर नमक जैसा लगता है।
कानपुर देहात में भी बाढ़ के हालात गंभीर हैं, हजारों लोग विस्थापित होकर परेशानियों से जूझ रहे हैं।

पीड़ितों की स्थिति और सरकारी इंतज़ाम
राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार कुल 84,392 लोग इस बाढ़ से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं, स्थिति विकट बनी हुई है।
सरकार ने 905 राहत शिविर बनाए हैं, जिनमें 11,248 लोग अभी अस्थायी रूप से रह रहे हैं, सुरक्षा की व्यवस्था भी है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 493 नावों और मोटरबोट्स की मदद से राहत सामग्री प्रभावितों तक पहुंचाई जा रही है।
बाढ़ के कारण अब तक 343 मकानों को नुकसान हुआ है, जिनमें से 327 को सहायता राशि मिल चुकी है।
गंगा के पुत्र सीधे स्वर्ग जाते हैं बोलने की बजाय मंत्री को राहत सामग्री और पुनर्वास की बात करनी चाहिए थी।
संजय निषाद का ‘दिव्य ज्ञान’
उत्तर प्रदेश सरकार के मत्स्य पालन मंत्री संजय निषाद बाढ़ प्रभावित कानपुर देहात के भोगनीपुर क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे।
बदलते हालात और पीड़ितों की परेशानी समझने के बजाय मंत्री जी धार्मिक बयान देने में व्यस्त नज़र आए।
मंत्री ने कहा, “गंगा के पुत्र सीधे स्वर्ग जाते हैं”, जो कि मौके की गंभीरता को कम करने वाला बयान है।
यह बात तब और अजीब लगी जब पता चला कि बाढ़ का कारण गंगा नहीं बल्कि यमुना नदी थी।
गंगा के पुत्र सीधे स्वर्ग जाते हैं जैसी बात ने वहां मौजूद लोगों को और गुस्से में ला दिया था।
जानकारी की कमी और असंवेदनशीलता
मंत्री जी को यह तक नहीं पता था कि जिस क्षेत्र में गए हैं वहां यमुना नदी के कारण बाढ़ आई है।
सरकारी अमले में से भी किसी ने उन्हें यह जानकारी नहीं दी, या दी भी हो तो उन्होंने अनसुनी कर दी।
इससे साफ होता है कि मंत्री जी का दौरा केवल औपचारिकता थी, ज़मीनी हकीकत से कोई लेना-देना नहीं था।
गंगा के पुत्र सीधे स्वर्ग जाते हैं बोलने से पीड़ितों को मदद नहीं बल्कि और ज्यादा पीड़ा महसूस हुई।
जनता उम्मीद करती है कि संकट के समय सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुने और समाधान दे।
अन्य जिलों की स्थिति
कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, आगरा, औरेया, चित्रकूट, बलिया, बांदा, गाजीपुर जैसे जिले भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं।
मिर्जापुर, प्रयागराज, वाराणसी, चंदौली, जालौन, हमीरपुर, इटावा, फतेहपुर जैसे जिलों में भी हालात गंभीर हैं।
इन 17 जिलों की 37 तहसीलों के 402 गांव पूरी तरह से पानी में डूबे हुए हैं, जनजीवन अस्त-व्यस्त है।
गंगा के पुत्र सीधे स्वर्ग जाते हैं कहने की बजाय, इन इलाकों में राहत कार्यों को तेज करना जरूरी है।
हर तरफ लोग मदद की गुहार लगा रहे हैं लेकिन मंत्री केवल बयानबाजी में व्यस्त नज़र आ रहे हैं।
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सीएम योगी का निर्देश और समीक्षा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 11 मंत्रियों को ग्राउंड ज़ीरो पर जाकर राहत कार्यों की निगरानी का आदेश दिया है।
इन मंत्रियों को राहत शिविरों, बांधों, जलभराव वाले इलाकों का दौरा करके स्थिति की समीक्षा करने को कहा गया।
संजय निषाद भी इसी आदेश के तहत कानपुर देहात पहुंचे थे लेकिन उनके बयान से नाराजगी बढ़ गई।
गंगा के पुत्र सीधे स्वर्ग जाते हैं जैसा कथन, सरकारी गंभीरता और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है।
लोगों को उम्मीद थी कि मंत्री मदद करेंगे, लेकिन उन्हें धर्म की बातें सुनने को मिलीं।
निष्कर्ष: बयानबाज़ी नहीं समाधान चाहिए
बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा में सरकार की जिम्मेदारी राहत पहुंचाने और पुनर्वास सुनिश्चित करने की होती है।
गंगा के पुत्र सीधे स्वर्ग जाते हैं कहने से न तो घर मिलेगा और न ही भूखे को खाना मिलेगा।
जनता नेताओं से दया नहीं, जिम्मेदारी की भावना और तत्परता की उम्मीद रखती है, खासकर आपदा के समय।
इस बयान से साबित होता है कि कई बार सत्ता में बैठे लोग ज़मीनी सच्चाई से कितने कटे हुए होते हैं।
अगर मंत्री समाधान नहीं दे सकते तो कम से कम ऐसे बयानों से लोगों के घावों पर नमक न छिड़कें।
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