भारत की आज़ादी का संघर्ष एक लंबी और कठिन यात्रा थी, जिसमें लाखों लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी।
सदियों तक विदेशी शासन के अधीन रहने के बाद, भारतीयों ने स्वतंत्रता पाने के लिए अनेक आंदोलन और क्रांतियां चलाईं।
शुरुआत में आज़ादी का विचार केवल कुछ बुद्धिजीवियों और क्रांतिकारियों तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे यह जनांदोलन बन गया।
अंग्रेजों ने भारत पर आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक नियंत्रण स्थापित किया, जिससे भारतीय समाज में असमानता और गरीबी बढ़ी।
इसके बावजूद, भारतीयों ने शिक्षा, संगठन और एकता के माध्यम से स्वतंत्रता का सपना जीवित रखा और संघर्ष जारी रखा।

भारत में आज़ादी के संघर्ष की शुरुआत
भारत की आज़ादी का संघर्ष : अंग्रेजों के आगमन के बाद भारत में राजनीतिक और आर्थिक शोषण ने आम जनता के जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया।
ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत के संसाधनों का दोहन किया और किसानों को भारी करों और कठोर नीतियों से परेशान किया।
धीरे-धीरे लोगों में असंतोष पनपने लगा, जो 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम का कारण बना।
1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
1857 का विद्रोह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का पहला बड़ा कदम था, जिसमें सैनिकों और आम जनता ने अंग्रेजों का विरोध किया।
इस विद्रोह में मंगल पांडे, रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे और बेगम हज़रत महल जैसे वीर शामिल थे।
हालांकि यह संग्राम असफल रहा, लेकिन इसने भारतीयों के मन में स्वतंत्रता का बीज बो दिया।
आज़ादी की लड़ाई के महत्वपूर्ण चरण
1857 के बाद स्वतंत्रता की लड़ाई कई चरणों में आगे बढ़ी, जिसमें नरम और उग्र दोनों तरह के नेताओं का योगदान रहा।
1885 में कांग्रेस की स्थापना के साथ राजनीतिक जागरूकता का नया दौर शुरू हुआ, जिसने स्वतंत्रता की नींव को मजबूत किया।
गांधीजी और असहयोग आंदोलन
महात्मा गांधी ने सत्याग्रह और अहिंसा को स्वतंत्रता संघर्ष का प्रमुख हथियार बनाया, जिसने जनता को बड़ी संख्या में जोड़ा।
1920 में असहयोग आंदोलन के जरिए लोगों ने विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया और अंग्रेजी संस्थानों से दूरी बनाई।
भारत छोड़ो आंदोलन
1942 में भारत छोड़ो आंदोलन ने स्वतंत्रता संग्राम को निर्णायक मोड़ दिया, जिसमें जनता ने अंग्रेजों को तुरंत भारत छोड़ने की मांग की।
इस आंदोलन में लाखों लोग जेल गए और कई ने अपने प्राणों की आहुति दी।
महान क्रांतिकारी और उनका योगदान
भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, सुखदेव, राजगुरु और नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने स्वतंत्रता संघर्ष में असाधारण साहस दिखाया।
इन क्रांतिकारियों ने अपने जीवन को देश की आज़ादी के लिए समर्पित कर दिया।
आज़ादी और उसके बाद का भारत
15 अगस्त 1947 को भारत ने लंबे संघर्ष के बाद स्वतंत्रता प्राप्त की, लेकिन देश का विभाजन हुआ और पाकिस्तान बना।
आजाद भारत ने लोकतंत्र, संविधान और विकास की दिशा में कदम बढ़ाया, जिसमें स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को साकार करने की कोशिश हुई।