नई दिल्ली, 23 अगस्त 2025
देशभर में बढ़ते स्ट्रे डॉग (आवारा कुत्तों) के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहम आदेश जारी किया। कोर्ट ने साफ कहा कि जो भी डॉग लवर्स (पशु प्रेमी) या एनजीओ (गैर सरकारी संगठन) इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटा रहे हैं, उन्हें सुनवाई से पहले पैसे जमा करने होंगे।
तीन जजों की विशेष बेंच, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस विक्रम नाथ कर रहे थे, ने आदेश दिया कि हर व्यक्ति को ₹25,000 और हर एनजीओ को ₹2 लाख कोर्ट की रजिस्ट्री में एक हफ्ते के भीतर जमा करना अनिवार्य होगा। अगर रकम जमा नहीं की गई तो उन्हें इस मामले में आगे पेश होने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
कोर्ट का मकसद: कुत्तों के लिए बेहतर सुविधा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह रकम बेकार नहीं जाएगी बल्कि इसे नगर निगमों के जरिए आवारा कुत्तों के लिए बुनियादी ढांचे और सुविधाएं विकसित करने में इस्तेमाल किया जाएगा।
जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन वी अंजारिया की मौजूदगी वाली बेंच ने साफ कहा –
“पशु प्रेमी और संगठन जो भी इस मुद्दे को लेकर आए हैं, उन्हें अपनी गंभीरता दिखानी होगी। यह पैसा कुत्तों की सुरक्षा और सुविधा में लगाया जाएगा।”
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने आदेश दिया था कि दिल्ली-एनसीआर में पकड़े गए आवारा कुत्तों को डॉग शेल्टर से बाहर नहीं छोड़ा जाएगा।
इस आदेश के बाद देशभर में भारी विरोध शुरू हो गया था। कई एनजीओ और पशु प्रेमियों ने अदालत से इस आदेश पर रोक लगाने की मांग की।
इसके बाद 28 जुलाई को बच्चों में रेबीज के बढ़ते मामलों और डॉग बाइट्स को लेकर स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) मामले में सुनवाई शुरू हुई।
नया आदेश: अपनाओ तो जिम्मेदारी भी लो
सुप्रीम कोर्ट ने अपने ताज़ा आदेश में कहा कि अगर कोई पशु प्रेमी किसी आवारा कुत्ते को अपनाना चाहता है, तो वह संबंधित नगर निगम से आवेदन कर सकता है।
जिसके बाद उस कुत्ते को टैग कर अपनाने वाले को सौंप दिया जाएगा।
लेकिन कोर्ट ने यह भी सख्ती से कहा –
“जिसने भी कुत्ता अपनाया, यह उसकी जिम्मेदारी होगी कि वह कुत्ता दोबारा सड़कों पर न लौटे।”
अब क्या होगा?
पकड़े गए कुत्तों को स्टरलाइज और वैक्सीनेट करने के बाद उसी इलाके में छोड़ा जाएगा।
दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम के सभी क्षेत्रों से कुत्तों को उठाने की प्रक्रिया जारी रहेगी।
11 अगस्त का वह आदेश, जिसमें कुत्तों को छोड़ने पर रोक थी, उसे फिलहाल टाल दिया गया है।
देशभर में गुस्सा और चिंता
11 अगस्त के आदेश के बाद देश के कई हिस्सों में पशु प्रेमियों ने विरोध प्रदर्शन किया था। उनका कहना था कि कुत्तों को शेल्टर में कैद रखना अमानवीय कदम है। वहीं, दूसरी ओर लोगों का कहना है कि सड़कों पर आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और काटने के मामलों ने सुरक्षा संकट खड़ा कर दिया है।
👉 सुप्रीम कोर्ट के इस नए फैसले से अब संतुलन साधने की कोशिश की गई है – यानी आवारा कुत्तों की सुरक्षा भी और लोगों की राहत भी।
Disclaimer
इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर आधारित है। DigitalNewsTak तथ्यों की पूर्ण सटीकता की गारंटी नहीं देता। किसी भी कानूनी या आधिकारिक कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग या सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक आदेश को देखें।
Follow on WhatsApp