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Rs 450 करोड़ का Ludhiana City Centre Project खंडहर में तब्दील, नशेड़ियों का अड्डा बनाl

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Ludhiana City Centre Project: सपना या अधूरा वादा?

Rs 450 करोड़ की लागत से शुरू किया गया Ludhiana City Centre Project आज खंडहर में तब्दील हो चुका है। 2003 में शुरू हुए इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को रोजगार पैदा करने, विदेशी निवेश आकर्षित करने और लुधियाना की शहरी पहचान को नया रूप देने के लिए बनाया गया था। लेकिन दो दशक बीतने के बाद भी यह सपना अधूरा ही रह गया है।

नशेड़ियों का अड्डा बना 25 एकड़ का प्रोजेक्ट

Shaheed Bhagat Singh Nagar में 25 एकड़ में फैला Ludhiana City Centre Project आज कूड़े, झाड़ियों और नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह जगह अब असुरक्षित हो गई है, खासकर रात के समय। बारिश के दिनों में गंदा पानी भर जाता है और बदबू असहनीय हो जाती है।

गुरविंदर सिंह, एक स्थानीय निवासी कहते हैं –
“गंध इतनी ज्यादा हो जाती है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। नशेड़ी खुलेआम घूमते रहते हैं और अंधेरे में बच्चों के लिए यह जगह बेहद खतरनाक है।”

अधूरा सपना, बर्बाद अवसर

रियल एस्टेट डेवलपर राकेश मल्होत्रा ने कहा –
“अगर यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाता, तो लुधियाना एक रीजनल कमर्शियल पावरहाउस बन सकता था। अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स आते और हजारों रोजगार बनते। लेकिन आज यह अधूरे वादों और प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक बन गया है।”

वहीं वर्ल्ड MSME फोरम के अध्यक्ष बदीश जिंदल ने कहा –
“Ludhiana City Centre Project पंजाब की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता था। लेकिन इसकी दुर्दशा ने शहर की छवि खराब कर दी है।”

अवन साइकल्स के चेयरमैन ओंकार सिंह पाहवा का बयान

“जब लुधियाना में नए-नए मॉल बन रहे हैं, तब Ludhiana City Centre Project जैसी महत्वाकांक्षी योजना का खंडहर बनना बेहद निराशाजनक है। अगर यह पूरा हो जाता, तो हजारों युवाओं को रोजगार मिलता और लुधियाना की आर्थिक प्रोफ़ाइल मजबूत होती।”

कानूनी पेंच और अधूरी उम्मीदें

Ludhiana Improvement Trust (LIT) के चेयरमैन तरसेम सिंह भिंदर का कहना है कि यह मामला अदालत में विचाराधीन है। वहीं अधिकारियों के मुताबिक, जब तक कानूनी विवाद खत्म नहीं होता, तब तक इसका पुनर्विकास संभव नहीं है।

दिवंगत विधायक गुरप्रीत गोगी ने इस साइट को मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में बदलने का प्रस्ताव भी रखा था, लेकिन उनके निधन के बाद यह सुझाव भी ठंडे बस्ते में चला गया।

सुरक्षा इंतजाम भी नाकाम

LIT ने साइट पर सेफ्टी शीट्स और बैरिकेड्स लगाने के लिए ₹6.4 लाख का टेंडर पास किया था। लेकिन अब ज्यादातर बैरिकेड्स टूट चुके हैं या गायब हैं। जगह-जगह गड्ढे और जंग लगे लोहे के सरिए खुले पड़े हैं।

अर्जुन शर्मा, SBS नगर के निवासी ने कहा –
यहां रोशनी नहीं है, कोई फेंसिंग नहीं है। पिछले साल एक आवारा जानवर गड्ढे में गिर गया था। मैंने इसकी शिकायत मानवाधिकार आयोग तक की, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।”

स्थानीय लोगों की परेशानी

सुख़जीत कौर बताती हैं –
मैंने सुबह-शाम की सैर बंद कर दी है। बरसात के दिनों में गंध असहनीय हो जाती है। अब यह जगह बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है।”

अधूरा सपना या बर्बाद सपना?

लगभग 22 साल बाद भी Ludhiana City Centre Project अधूरा ही है। यह सिर्फ एक खंडहर नहीं, बल्कि उस सपने की याद है जो रोजगार, निवेश और आधुनिक विकास का प्रतीक बन सकता था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इस कानूनी विवाद को जल्द सुलझाया जाए और प्रोजेक्ट को पुनर्जीवित किया जाए, तो यह लुधियाना की अर्थव्यवस्था और पहचान दोनों को मजबूत कर सकता है।


📌 निष्कर्ष

Rs 450 करोड़ का Ludhiana City Centre Project आज लुधियाना की सबसे बड़ी विफलता के रूप में सामने आया है। यह न सिर्फ शहर की शहरी योजना की कमजोरी दिखाता है, बल्कि कानूनी और प्रशासनिक पंगों की वजह से कैसे सपने अधूरे रह जाते हैं, इसका जीवंत उदाहरण भी है।


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यह आर्टिकल सार्वजनिक स्रोतों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है। Digital NewsTak किसी भी तरह के आरोपों या बयानों की पुष्टि नहीं करता। पाठकों से आग्रह है कि वे इस खबर को आधिकारिक स्रोतों से भी सत्यापित करें।

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Prashant srivastava

प्रशांत श्रीवास्तव Digital News Tak के संस्थापक हैं। यह एक भरोसेमंद हिंदी समाचार प्लेटफॉर्म है, जहाँ पाठकों को देश-दुनिया की ताज़ा घटनाएं, मनोरंजन समाचार और ताज़ा खबरें हिंदी में सबसे पहले और सटीक रूप से मिलती हैं। Digital News Tak आज लाखों लोगों की पसंदीदा जगह है भरोसेमंद हिंदी समाचारों के लिए।

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