ट्रम्प का टैरिफ बम और दुनिया में हलचल
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में भारत और ब्राज़ील से आने वाले उत्पादों पर 50% का भारी टैरिफ लगा दिया।
इस कदम ने दोनों देशों के निर्यातकों, किसानों और व्यापार जगत में चिंता की लहर पैदा कर दी।
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मोदी का स्पष्ट संदेश: “किसानों के हित पर समझौता नहीं”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कहा:
“हम अपने किसानों, डेयरी और मछली पालन से जुड़े लोगों के हितों से कभी समझौता नहीं करेंगे।”
यह बयान न सिर्फ आर्थिक नीति का संकेत था, बल्कि एक भावनात्मक वादा भी, जो देश के ग्रामीण इलाकों में गूंज उठा।

लूला का आत्मसम्मान भरा रुख
ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने भी ट्रम्प से सीधी बातचीत को ‘अपमानजनक’ कहकर खारिज कर दिया। उनका कहना था कि वे अपने देश के सम्मान से समझौता नहीं करेंगे।
मोदी-लूला बातचीत: साझेदारी की नई दिशा
दोनों नेताओं ने फ़ोन पर चर्चा में तय किया कि वे:
2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $20 अरब तक ले जाएंगे
Mercosur-India Trade Agreement को मजबूत करेंगे
BRICS देशों के साथ मिलकर टैरिफ संकट का सामूहिक समाधान निकालेंगे
BRICS में मजबूती और वैश्विक दक्षिण की आवाज़
इस बातचीत का बड़ा संदेश यह था कि भारत और ब्राज़ील सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि Global South की आवाज़ बनकर खड़े हैं।
BRICS के मंच पर एकजुट होकर, वे अमेरिका और यूरोप जैसी आर्थिक शक्तियों के सामने संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
भावनाओं से जुड़ी कहानी
यह सिर्फ राजनीति नहीं थी—यह थी किसानों की फसल, मछुआरों की रोज़ी और फैक्ट्रियों की धड़कन की लड़ाई।
दोनों नेताओं ने दिखाया कि दोस्ती, भरोसा और सम्मान किसी भी टैरिफ से ज्यादा ताकतवर है।
निष्कर्ष: संकट में उम्मीद की किरण
टैरिफ तूफ़ान के बीच, मोदी और लूला की यह बातचीत एक साफ संदेश देती है—अगर साझेदारी मजबूत हो, तो कोई भी आर्थिक संकट पार किया जा सकता है।
सोशल मीडिया कैप्शन आइडियाज़
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- “मोदी-लूला की बातचीत: Global South की नई ताकत” 💪
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