ब्राजील के रियो डी जनेरियो में आयोजित 17वें BRICS शिखर सम्मेलन ने भले ही दुनिया को वैश्विक सहयोग का संदेश दिया हो, BRICS की अमेरिका अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह सम्मेलन बिल्कुल भी रास नहीं आया।
ट्रंप ने इस सम्मेलन को “अमेरिका के खिलाफ साजिश” करार देते हुए कड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने यहां तक कह डाला कि जो भी देश BRICS की “एंटी-अमेरिकन” नीतियों के साथ खड़ा होगा, उस पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा – “बिना किसी अपवाद के!”
🇺🇸 व्हाइट हाउस का अलर्ट: “हर कदम पर नज़र है”
ट्रंप के इस सख्त रुख के बाद व्हाइट हाउस ने भी पुष्टि की है कि BRICS देशों की गतिविधियों पर लगातार नज़र रखी जा रही है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने कहा:
“ट्रंप का मानना है कि BRICS अमेरिका के राष्ट्रीय हितों को कमजोर करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वे इस तरह की किसी भी साजिश को कामयाब नहीं होने देंगे।“
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका अब आर्थिक स्तर पर सभी जरूरी कदम उठाने को तैयार है ताकि कोई भी देश अमेरिका का “दुरुपयोग” न कर सके।
💬 ट्रंप का सीधा संदेश: “10% टैरिफ लगेगा!”
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक जोरदार पोस्ट करते हुए लिखा:
“जो देश BRICS की एंटी-अमेरिकन रणनीतियों के साथ खड़े होंगे, उन पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। No exceptions!“
उनका यह बयान अब वैश्विक व्यापार जगत में कड़ी प्रतिक्रिया और बहस को जन्म दे चुका है।
🌐 BRICS का जवाब: “हम व्यापार युद्ध नहीं, स्थायित्व चाहते हैं”
दूसरी ओर, BRICS नेताओं ने अपने संयुक्त बयान में अमेरिका का नाम लिए बिना जवाब देते हुए कहा:
“हम एकतरफा प्रतिबंधों, टैरिफ बढ़ोतरी और व्यापार में गैर-शुल्क रुकावटों से चिंतित हैं। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है।“
BRICS का फोकस WTO जैसे नियम आधारित सिस्टम को मजबूत करने और वैश्विक व्यापार में संतुलन और स्थायित्व बनाए रखने पर है।
🌍 BRICS की ताकत: अब केवल पांच नहीं, दस देशों का गठबंधन
इस बार के शिखर सम्मेलन में BRICS का चेहरा और भी बड़ा और प्रभावशाली नज़र आया।
अब BRICS में शामिल हैं:
🇧🇷 ब्राज़ील
🇷🇺 रूस
🇮🇳 भारत
🇨🇳 चीन
🇿🇦 दक्षिण अफ्रीका
…और अब नए सदस्य:
🇪🇬 मिस्र
🇪🇹 इथियोपिया
🇮🇷 ईरान
🇦🇪 यूएई
🇮🇩 इंडोनेशिया
यह समूह अब:
- दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है
- वैश्विक GDP का 40% हिस्सा इसकी हिस्सेदारी में है
- और विश्व व्यापार का एक-चौथाई भाग BRICS के पास है
ऐसे में अमेरिका को BRICS का बढ़ता असर “चिंताजनक” लगना स्वाभाविक है।
🤝 सहयोग या टकराव? बढ़ता आर्थिक ध्रुवीकरण
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान केवल एक आर्थिक चेतावनी नहीं, बल्कि यह भविष्य की वैश्विक राजनीतिक दिशा की झलक भी है।
BRICS जहां व्यापार में संतुलन और बहुपक्षीयता की बात कर रहा है, वहीं अमेरिका अब ‘अमेरिका फर्स्ट’ पॉलिसी की ओर फिर से बढ़ता नज़र आ रहा है।
📢 क्या होगा असर?
- 🔺 BRICS देशों के साथ अमेरिकी व्यापार पर सीधा असर
- 📉 भारत समेत कई देशों के लिए कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना मुश्किल
- 🔁 वैश्विक निवेश में नए समीकरण
- 🛑 व्यापार युद्ध की आशंका, खासकर चीन, ईरान और रूस जैसे देशों के साथ
🔍 निष्कर्ष: BRICS vs USA – अगला व्यापार युद्ध?
एक तरफ है BRICS, जो एक स्थिर, बहुपक्षीय और सहयोगात्मक वैश्विक व्यापार की बात करता है।
दूसरी ओर, अमेरिका है जो अपने हितों की रक्षा के लिए आक्रामक रणनीति अपना रहा है।
क्या यह अगला व्यापार युद्ध शुरू होने का संकेत है?
क्या भारत जैसे देशों को अब दो ध्रुवों के बीच संतुलन साधना होगा?
क्या ट्रंप फिर से राष्ट्रपति बनकर इस संघर्ष को और तेज़ करेंगे?
इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में मिलेंगे, लेकिन इतना तय है – दुनिया अब नई दिशा की ओर बढ़ रही है।
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